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Showing posts from December, 2021

वो शख्स

                    रात हुई और नींद से जगा रहा है वो शक्स, बेवक्त बातें सुना रहा है वो शख्स, उससे जो 2 -4 दिन तक राबता रहा सो रहा, मुझे खुद से मिला रहा है वो शख्स ।। अपनी जुल्फों की चकरी के चक्कर कटा कर, थकावटें सारी मिटा रहा है वो शख्स। जो आंखों का जादू हो मौसम सुहाना, बिन पिए ही खुमारी चढ़ा रहा है वो शख्स ।। इक छोटी सी बिंदिया है माथे पे उसके, मेरे लफ्जों की डोरी हिला रहा है वो शख्स। मेरे बालों का रंग सफेद होने की आरजू में, और कमाल का इश्क सिखा रहा है वो शख्स ।। सारी दुनियां घूम कर , दर उसी के आकर बैठा हूं, मुझे मुझसे ही चुरा रहा है वो शख्स। अब तो अंजान , बाहों में ही दम निकले उसकी, ख्वाब से तो जाग , देख बुला रहा है वो शख्स ।।