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❣️ANJAAN


ANJAAN


Mana Badalna fitrat thi uski,
Insan hi to tha,
Vaado k darmiyan uska mukrna,
Beyimaan hi to tha.

Lgta ajab sa tha,
Ye rishta gazab sa tha,
Lga jaan aa gyi ab muurdo mai ,
Magar vo be-jaan hi to tha.

Ab dooriyan b khoob hogi ,
Mai to roya hi tha,
Royi vo b zaroor hogi,
Kahani adhuri hi sahi meri,
Kisi ki mukammal b zaroor hogi,

Mere yakeen ka usne,
Waah kya sila diya,
कमसेकम Dokhe mai vo meharbaan hi to tha,
Muje to jinjod diya uski yaadon ne hi,
Is khata se mai Anjaan hi to tha.

#_koushal_s
#_anjaan_

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ना हुआ

फ़कत चाहा बस तुझे, तुझे भुलाना ना हुआ, उम्र भर का सफ़र गुज़रा, तेरा आना ना हुआ, मुद्दतौ बाद भी पकड़े रखा तस्वीर को, मंज़ूर गवाना ना हुआ, निकला तो था घर से में, तुझ तक आना ना हुआ, आकर कुछ कहता तुझको, इतना सेयाना ना हुआ, दूर से ही देखता रहा तुझको, पास आना ना हुआ, तु आवाज़ दे में हूं कहुँ वो सिलसिला ना हुआ, वादे तो बहुत टूटे, निभाना ना हुआ, अब आंसु अंधेरों में छुपा गया, दिखाना ना हुआ, जीने के सिवा ना रहा कोई रास्ता, मर जाना ना हुआ, जो भी हुआ हम बिछड़े ही , मशहूर याराना ना हुआ, देखा तेरे बाद भी बहुतों को, दिवाना ना हुआ, सब नया-नया सा है अब भी , कुछ पुराना ना हुआ, तु भी मुझे चाहने लगे, ये अफ़साना ना हुआ, फ़कत चाहा बस तुझे, तुझे भुलाना ना हुआ। Visit :-  https://t.me/TheAnjaanSeries

ज़माना हो गया

हमारी जोड़ी क्या ख़ूब लगेगी बीच शहर बगीचे में, हाथ पकड़ अब साथ चले,ज़माना हो गया। हाथ में धागा बांद दिया था, नज़रों से बचाने को, अब नज़र उतारे मुझको भी ज़माना हो गया। वो झील किनारे का सफ़र, याद तो तुमको होगा ही, अब वो सफ़र गुज़ारे हमको भी ज़माना हो गया। दीवारों को फांदके जो पहुंचते थे दूर देश, वहां भी अब रात गुज़ारे ज़माना हो गया, मेरी तरफ़ देखो तुम्हे कसम, ज़ुबां पर था उनकी, कसम से ये लफ्ज़ सुने ज़माना हो गया। तुम लोट के नहीं देखते हो जाते वक्त, कहते थे ना, आज खुद ही ना लोटे ज़माना हो गया। जीतकर भी हार जाते थे उनके सामने हर बार, अब हारे हुए भी हमको ज़माना हो गया। अब हर किसी के साथ गुल-मिल जाते हैं हम, बिछड़े हुए भी हमको हमीं से ज़माना हो गया। बनाते हैं अब कई कहानियों की नज़्में, ख़त को जोड़ किताब बनाए ज़माना हो गया। किताबों में ही सूख गए होंगे वो फूल, निकाले हुए जिनको अब ज़माना हो गया। मेरी इक तस्वीर है शायद अब भी पास तुम्हारे, मुझे तो तेरी हर याद जलाए ज़माना हो गया। भूलने को यादाश आ गई है अब  सर्द में वो हीटर जलाए ज़माना हो गया कुछ ना कुछ अब तुम्हे समझ आ ही गया , ख़ैर...

वो शख्स

                    रात हुई और नींद से जगा रहा है वो शक्स, बेवक्त बातें सुना रहा है वो शख्स, उससे जो 2 -4 दिन तक राबता रहा सो रहा, मुझे खुद से मिला रहा है वो शख्स ।। अपनी जुल्फों की चकरी के चक्कर कटा कर, थकावटें सारी मिटा रहा है वो शख्स। जो आंखों का जादू हो मौसम सुहाना, बिन पिए ही खुमारी चढ़ा रहा है वो शख्स ।। इक छोटी सी बिंदिया है माथे पे उसके, मेरे लफ्जों की डोरी हिला रहा है वो शख्स। मेरे बालों का रंग सफेद होने की आरजू में, और कमाल का इश्क सिखा रहा है वो शख्स ।। सारी दुनियां घूम कर , दर उसी के आकर बैठा हूं, मुझे मुझसे ही चुरा रहा है वो शख्स। अब तो अंजान , बाहों में ही दम निकले उसकी, ख्वाब से तो जाग , देख बुला रहा है वो शख्स ।।