हमारी जोड़ी क्या ख़ूब लगेगी बीच शहर बगीचे में,
हाथ पकड़ अब साथ चले,ज़माना हो गया।
हाथ में धागा बांद दिया था, नज़रों से बचाने को,
अब नज़र उतारे मुझको भी ज़माना हो गया।
वो झील किनारे का सफ़र, याद तो तुमको होगा ही,
अब वो सफ़र गुज़ारे हमको भी ज़माना हो गया।
दीवारों को फांदके जो पहुंचते थे दूर देश,
वहां भी अब रात गुज़ारे ज़माना हो गया,
मेरी तरफ़ देखो तुम्हे कसम, ज़ुबां पर था उनकी,
कसम से ये लफ्ज़ सुने ज़माना हो गया।
तुम लोट के नहीं देखते हो जाते वक्त, कहते थे ना,
आज खुद ही ना लोटे ज़माना हो गया।
जीतकर भी हार जाते थे उनके सामने हर बार,
अब हारे हुए भी हमको ज़माना हो गया।
अब हर किसी के साथ गुल-मिल जाते हैं हम,
बिछड़े हुए भी हमको हमीं से ज़माना हो गया।
बनाते हैं अब कई कहानियों की नज़्में,
ख़त को जोड़ किताब बनाए ज़माना हो गया।
किताबों में ही सूख गए होंगे वो फूल,
निकाले हुए जिनको अब ज़माना हो गया।
मेरी इक तस्वीर है शायद अब भी पास तुम्हारे,
मुझे तो तेरी हर याद जलाए ज़माना हो गया।
भूलने को यादाश आ गई है अब
सर्द में वो हीटर जलाए ज़माना हो गया
कुछ ना कुछ अब तुम्हे समझ आ ही गया ,
ख़ैर हमें तो समझाए अब ज़माना हो गया।
इक जगह ही गुजरता है अब सफ़र ए जिन्दगी,
फिर से तेरे शहर को आए ज़माना हो गया।
हाथ पकड़ अब साथ चले ज़माना हो गया,
कसम से ये लफ्ज़ सुने ज़माना हो गया।
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