ख़त के इक छोटे से तराशे में कैसे लिखुँ ?
मैं अपने सारे ख़्वाब पन्ने के इक पासे कैसे लिखुँ ?
कुछ सोचे बिना लिखूं इस तरफ़,कुछ उस तरफ़ भी लिखुँ
मैं हर बात इरादे से कैसे लिखुँ ?
लिखने को बैठूं तो तेरी हर बात लिखुँ
मैं तेरे वो दिलासे सच्चे - झूठे कैसे लिखुँ ?
वो मेरी ख़ुशी बता रहें हैं हर किसी को
मैं अपने ग़म इक आह से कैसे लिखुँ ?
आंसु लिखूं तो सब तुझे कोसे
मैं हर ग़म मुस्कुराके कैसे लिखुँ ?
ख़त लिखूं की तू अब भी प्यारा है
ये बात तेरे जाने के बाद कैसे लिखुँ ?
मैं तो रात की स्याह अंधेर में भी तुझे लिखता हूं
दिन की रोशनाई में भी कैसे लिखुँ ?
तुम तो अब घैरो से मिलते हो, सुनने में आया है
इस खबर को अपने ही हाथ से कैसे लिखुँ ?
मेरे बुझने पर करते मेरे इश्क़ की तौहीन
मुझे जीते - ज़ी आजमाया कैसे लिखुं ?
अब मुझे आशिक समझो चाहें कुछ भी
अभी अपना कुछ नहीं बताया... कैसे लिखुँ ? ।।।।॥।।।।
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