हाथ जो दिए भीड़ में
खुले रास्ते में छूट जाते हैं।
वादा क्या करना
वादे टूट जाते हैं।
खबरें जो रखते हैं हर बात की
दिन जो बीते खबरें भूल जाते हैं।
तोहफे ही संभलते हैं उमर भर के लिए।
रिश्ते अक्सर इंसान के छूट जाते हैं।
दूर के जो थे साथ रह लिए
यहाँ अपने ही अपनों को लूट जाते हैं।
वहां पेड़ राहगीरों को शाओं कैसे दे
यहां पत्ते ही टेहनी से रूठ जाते हैं।
रेत के टीलो पर रोक रहे है रास्ता घोड़ों का
किस ज़ुबां से कहूं वहां ऊँठ जाते हैं।
फूल जो खिल रहे है शान से
मौसम के बीते ही सूख जाते हैं।
सच्चों में रह लिए हैं बिछड़ने के बाद
अब चलो तो उस रास्ते जिदर झूठ जाते हैं।
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