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बहुत फ़िक्र हो रही है

Bhut fikr ho rhi ha
बहुत फ़िक्र हो रही है
Mere sath aakar tanhayi so rahi hai
मेरे साथ आकर तन्हाई सौ रही है
Purane drakht kat rhe hain
पुराने दरख़्त कट रहे हैं
Naye beej bo rahi hai
नए बीज बो रही है
Aag jab se sulag gyi
आग जब से सुलग गई
Aankh tab se ro rahi hai
आंख तब से रो रही है
Purane mere zakhmo ko
पुराने मेरे ज़ख्मों को
Aansuo se dho rahi hai
आंसुओ से धो रही है 
Is mehfil me mai, sath tanhayi
इस महफ़िल में मैं, साथ तन्हाई
Naa kahi baatain ho rahi hain
ना कहीं बातें हो रही हैं
Sambali hui kahaniya 
संभाली हुई सब कहानियां
Mujhse ab khi kho rahi hain
मुझसे अब कहीं खो रही हैं
Pass jo brso se, thi mere
पास जो बरसों से थी मेरे
Door vo mujse ho rahi hai
दूर वो मुझसे हो रही है
Betaab jise hai kehne ko 
बेताब जिसे है कहने को 
Aankhe vo do(2) rahi hai 
आंखे वो दो रही है 
Bhut fikr ho rahi hai
बहुत फ़िक्र हो रही है।

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ना हुआ

फ़कत चाहा बस तुझे, तुझे भुलाना ना हुआ, उम्र भर का सफ़र गुज़रा, तेरा आना ना हुआ, मुद्दतौ बाद भी पकड़े रखा तस्वीर को, मंज़ूर गवाना ना हुआ, निकला तो था घर से में, तुझ तक आना ना हुआ, आकर कुछ कहता तुझको, इतना सेयाना ना हुआ, दूर से ही देखता रहा तुझको, पास आना ना हुआ, तु आवाज़ दे में हूं कहुँ वो सिलसिला ना हुआ, वादे तो बहुत टूटे, निभाना ना हुआ, अब आंसु अंधेरों में छुपा गया, दिखाना ना हुआ, जीने के सिवा ना रहा कोई रास्ता, मर जाना ना हुआ, जो भी हुआ हम बिछड़े ही , मशहूर याराना ना हुआ, देखा तेरे बाद भी बहुतों को, दिवाना ना हुआ, सब नया-नया सा है अब भी , कुछ पुराना ना हुआ, तु भी मुझे चाहने लगे, ये अफ़साना ना हुआ, फ़कत चाहा बस तुझे, तुझे भुलाना ना हुआ। Visit :-  https://t.me/TheAnjaanSeries

ज़माना हो गया

हमारी जोड़ी क्या ख़ूब लगेगी बीच शहर बगीचे में, हाथ पकड़ अब साथ चले,ज़माना हो गया। हाथ में धागा बांद दिया था, नज़रों से बचाने को, अब नज़र उतारे मुझको भी ज़माना हो गया। वो झील किनारे का सफ़र, याद तो तुमको होगा ही, अब वो सफ़र गुज़ारे हमको भी ज़माना हो गया। दीवारों को फांदके जो पहुंचते थे दूर देश, वहां भी अब रात गुज़ारे ज़माना हो गया, मेरी तरफ़ देखो तुम्हे कसम, ज़ुबां पर था उनकी, कसम से ये लफ्ज़ सुने ज़माना हो गया। तुम लोट के नहीं देखते हो जाते वक्त, कहते थे ना, आज खुद ही ना लोटे ज़माना हो गया। जीतकर भी हार जाते थे उनके सामने हर बार, अब हारे हुए भी हमको ज़माना हो गया। अब हर किसी के साथ गुल-मिल जाते हैं हम, बिछड़े हुए भी हमको हमीं से ज़माना हो गया। बनाते हैं अब कई कहानियों की नज़्में, ख़त को जोड़ किताब बनाए ज़माना हो गया। किताबों में ही सूख गए होंगे वो फूल, निकाले हुए जिनको अब ज़माना हो गया। मेरी इक तस्वीर है शायद अब भी पास तुम्हारे, मुझे तो तेरी हर याद जलाए ज़माना हो गया। भूलने को यादाश आ गई है अब  सर्द में वो हीटर जलाए ज़माना हो गया कुछ ना कुछ अब तुम्हे समझ आ ही गया , ख़ैर...

वो शख्स

                    रात हुई और नींद से जगा रहा है वो शक्स, बेवक्त बातें सुना रहा है वो शख्स, उससे जो 2 -4 दिन तक राबता रहा सो रहा, मुझे खुद से मिला रहा है वो शख्स ।। अपनी जुल्फों की चकरी के चक्कर कटा कर, थकावटें सारी मिटा रहा है वो शख्स। जो आंखों का जादू हो मौसम सुहाना, बिन पिए ही खुमारी चढ़ा रहा है वो शख्स ।। इक छोटी सी बिंदिया है माथे पे उसके, मेरे लफ्जों की डोरी हिला रहा है वो शख्स। मेरे बालों का रंग सफेद होने की आरजू में, और कमाल का इश्क सिखा रहा है वो शख्स ।। सारी दुनियां घूम कर , दर उसी के आकर बैठा हूं, मुझे मुझसे ही चुरा रहा है वो शख्स। अब तो अंजान , बाहों में ही दम निकले उसकी, ख्वाब से तो जाग , देख बुला रहा है वो शख्स ।।